गन्ने की खेती से बढ़ाएं अपना मुनाफा: 150 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार पाने का गुप्त तरीका





गन्ने की उन्नत खेती: वैज्ञानिक तकनीक, किस्में और पैदावार बढ़ाने का संपूर्ण मार्गदर्शन

गन्ना भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल है जो करोड़ों किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तकनीकी बुलेटिन के अनुसार, भारत में गन्ने की खेती को केवल एक पारंपरिक कार्य न मानकर यदि इसे वैज्ञानिक पद्धति से किया जाए, तो उत्पादन को 120-150 टन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाया जा सकता है। यह लेख आपकी वेबसाइट के पाठकों को बुवाई से लेकर कटाई तक की वह बारीक जानकारी देगा जो अक्सर खेतों तक नहीं पहुँच पाती।

1. भारत के कृषि-जलवायु क्षेत्र और गन्ने का चुनाव

गन्ने की खेती के लिए भारत को मुख्य रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है, जिनकी भौगोलिक स्थितियां बिल्कुल अलग हैं।

उपोष्णकटिबंधीय (Sub-tropical)

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार। यहाँ सर्दियों में बहुत ठंड होती है, इसलिए ‘शरदकालीन’ बुवाई (अक्टूबर) सबसे अच्छी मानी जाती है ताकि पौधे पाले से पहले जड़ें जमा लें।

उष्णकटिबंधीय (Tropical)

महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु। यहाँ का तापमान साल भर स्थिर रहता है। यहाँ ‘अधसाली’ (जुलाई-अगस्त) बुवाई की जाती है जो सबसे अधिक वजन वाला गन्ना पैदा करती है।

2. मिट्टी की तैयारी और वैज्ञानिक जुताई

गन्ने की जड़ें मिट्टी में 30 से 60 सेमी तक गहरी जाती हैं। इसलिए, केवल ऊपर की जुताई पर्याप्त नहीं है।

  • गहरी जुताई: डिस्क हल या मिट्टी पलटने वाले हल से कम से कम 25-30 सेमी गहरी जुताई करें।
  • भुरभुरी मिट्टी: दो बार कल्टीवेटर और पाटा चलाकर मिट्टी को इतना भुरभुरा बनाएं कि हवा का संचार जड़ों तक हो सके।
  • कार्बनिक पदार्थ: जुताई के अंतिम चरण में 200-250 क्विंटल अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर जरूर मिलाएं।

3. उन्नत किस्में (Varieties)

किस्मों का चयन मिट्टी की गुणवत्ता और पानी की उपलब्धता के आधार पर होना चाहिए।

  • उत्तर भारत के लिए अगेती किस्में: CoLK-14201,Cos-13235,Co 0118,CoS-17231।
  • सामान्य किस्में: CoS 767, CoS 8436, Co 1148।
  • दक्षिण भारत के लिए: Co 86032 (सबसे ज्यादा पैदावार), CoC 671।

4. बीज उपचार (Seed Treatment)

Ganne ke beej ka vaigyanik upchar

गन्ने की फसल में बीमारियां बीज के जरिए ही आती हैं। बिना उपचार के बोया गया गन्ना ‘लाल सड़न’ (Red Rot) का शिकार हो सकता है।

उपचार प्रक्रिया: बीजों को 100 लीटर पानी में 200 ग्राम कार्बेंडाजिम (Bavistin) के घोल में 15 मिनट डुबोएं। यदि गर्म जल उपचार (MHAT) उपलब्ध है, तो 50°C पानी में 2 घंटे तक बीजों को रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

5. बुवाई की उन्नत और आधुनिक विधियां

जमाना बदल गया है, अब पारंपरिक कूड़ विधि के बजाय ये विधियां अपनाएं:

    Ganne ki kheti ki trench vidhi

  1. ट्रेंच विधि (Trench Method): 120-150 सेमी की दूरी पर गहरी खाइयां बनाई जाती हैं। इसमें गन्ना गिरता नहीं है और हवा का संचार बेहतरीन रहता है।
  2. एस.टी.पी (STP) तकनीक: नर्सरी में पौध तैयार करके खेत में लगाना। इसमें बीज की मात्रा मात्र 20% लगती है।
  3. रिंग पिट विधि: इसमें 90 सेमी गहरे गड्ढों में बुवाई की जाती है। यह ड्रिप सिंचाई के साथ मिलकर चमत्कारिक पैदावार देती है।

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6. पोषक तत्व और खाद प्रबंधन (Nutrient Management)

गन्ना एक ‘भारी खुराक’ वाली फसल है। संतुलित पोषण के बिना वजन नहीं बढ़ता।

पोषक तत्वमात्रा (kg/ha)देने का समय
नाइट्रोजन (N)150-250तीन बार (बुवाई, कल्ले निकलने पर, मिट्टी चढ़ाते समय)
फास्फोरस (P)80-100पूरी मात्रा बुवाई के समय गहराई में
पोटाश (K)80-120दो किस्तों में (पोटाश से चीनी बढ़ती है)

7. जल प्रबंधन: सिंचाई का सही गणित

गन्ने को अपने पूरे चक्र में 2000-2500 mm पानी चाहिए। लेकिन इसे बाढ़ की तरह देने के बजाय वैज्ञानिक रूप से दें।

  • कल्ले निकलते समय (Formative Stage): बुवाई के 60 से 130 दिन के बीच नमी की कमी नहीं होनी चाहिए, वरना गन्ने पतले रह जाएंगे।
  • ट्रैश मल्चिंग (Trash Mulching): कटाई के बाद सूखी पत्तियों को खेत में बिछाने से मिट्टी की नमी सुरक्षित रहती है।
  • ड्रिप सिंचाई: अगर संभव हो, तो ड्रिप अपनाएं। इससे 40% पानी बचता है और पैदावार 30 टन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ जाती है।

8. कीट और रोग नियंत्रण (Plant Protection)

Ganne mein lal sadan rog ke lakshan

गन्ने में कीटों का हमला चीनी की रिकवरी को सीधे तौर पर कम कर देता है।

  • चोटी बेधक (Top Borer): इसके लिए जुलाई के महीने में फेरटेरा या कोराजन का उपयोग करें।
  • लाल सड़न (Red Rot): इसे ‘गन्ने का कैंसर’ कहते हैं। अगर खेत में लाल सड़न दिखे, तो उस पौधे को उखाड़कर जला दें और अगली बार उस खेत में गन्ना न लगाएं।
  • पायरीला: पत्तियों के नीचे सफेद कीड़े दिखने पर एपिरिकानिया (मित्र कीट) का सहारा लें।

9. पेड़ी प्रबंधन (Ratoon Management)

ज्यादातर किसान पेड़ी में घाटा उठाते हैं। पेड़ी से फायदा लेने के लिए:

  • कटाई जमीन के सतह से करें (Stubble Shaving)।
  • पेड़ी को मुख्य फसल से 25% अधिक नाइट्रोजन दें।
  • जहाँ पौधे न उगे हों, वहाँ नए पौध लगाएं (Gap Filling)।

10. अंतःफसलीय खेती (Intercropping)

गन्ने के साथ आलू और सरसों की अंतःफसलीय खेती

गन्ने के साथ आलू, सरसों, लहसुन या धनिया उगाने से किसान को मुख्य फसल तैयार होने से पहले ही पैसा मिल जाता है। यह जमीन के प्रभावी उपयोग का सबसे अच्छा तरीका है।

निष्कर्ष (Conclusion)

गन्ने की खेती मुनाफे का सौदा तब बनती है जब हम किस्मों के चयन से लेकर कटाई के प्रबंधन तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हैं। मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद का प्रयोग और जल प्रबंधन ही वह कुंजी है जो किसानों को समृद्ध बनाएगी।


गन्ने की खेती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. गन्ने की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर भारत में शरदकालीन बुवाई के लिए अक्टूबर और वसंतकालीन बुवाई के लिए फरवरी-मार्च का समय सबसे उत्तम है। दक्षिण भारत में जुलाई-अगस्त (अधसाली) में बुवाई की जाती है।

2. गन्ने की कौन सी किस्म सबसे ज्यादा पैदावार देती है?
वर्तमान में Co 0238 (करण-4) उत्तर भारत में सबसे लोकप्रिय थी और् भी नई variety है जो और अधिक पैदावार दे रही है है। दक्षिण भारत में Co 86032 (नयना) सबसे अधिक पैदावार देती है।

3. बीज उपचार (Seed Treatment) क्यों जरूरी है?
बीज उपचार करने से गन्ने को ‘लाल सड़न’ (Red Rot), ‘कंडुआ’ (Smut) और दीमक जैसे रोगों से बचाया जा सकता है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है और फसल स्वस्थ रहती है।

4. गन्ने की फसल में कितनी खाद (NPK) डालनी चाहिए?
औसतन प्रति हेक्टेयर 150-250 किलो नाइट्रोजन, 80 किलो फास्फोरस और 80 किलो पोटाश की आवश्यकता होती है। मिट्टी की जांच के आधार पर इसकी मात्रा कम या ज्यादा की जा सकती है।

5. ‘ट्रेंच विधि’ से बुवाई के क्या फायदे हैं?
ट्रेंच विधि में गन्ने की जड़ें गहरी जाती हैं, जिससे गन्ना गिरता नहीं है। इसके अलावा, लाइनों के बीच अधिक जगह होने से हवा और धूप अच्छी मिलती है, जिससे गन्ने की मोटाई बढ़ती है।

6. गन्ने में ‘लाल सड़न’ (Red Rot) की पहचान कैसे करें?
यदि गन्ने की तीसरी या चौथी पत्ती ऊपर से पीली होने लगे और गन्ने को बीच से चीरने पर अंदर का हिस्सा लाल दिखे और उसमें से सिरके जैसी गंध आए, तो यह लाल सड़न रोग है।

7. पेड़ी (Ratoon) फसल की पैदावार कैसे बढ़ाएं?
पेड़ी फसल के लिए कटाई हमेशा जमीन की सतह से करें, खाली जगहों पर नई पौध लगाएं (Gap Filling) और मुख्य फसल की तुलना में 25% अधिक नाइट्रोजन का उपयोग करें।

8. गन्ने के साथ कौन सी फसलें (Intercropping) उगाई जा सकती हैं?
शरदकालीन गन्ने के साथ आलू, सरसों, मटर और धनिया उगाया जा सकता है। वसंतकालीन बुवाई के साथ मूंग या उड़द जैसी दलहनी फसलें लेना फायदेमंद होता है।

9. गन्ने की सिंचाई के लिए सबसे अच्छी तकनीक कौन सी है?
ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) सबसे अच्छी तकनीक है। इससे 40% पानी की बचत होती है और खाद सीधे जड़ों तक पहुँचती है, जिससे पैदावार 25-30% बढ़ जाती है।

10. गन्ने की कटाई कब करनी चाहिए?
जब गन्ने की निचली पत्तियां सूखने लगें और हैंड रिफ्रेक्टोमीटर (Brix) की रीडिंग 18-20% के बीच आ जाए, तब गन्ना कटाई के लिए पूरी तरह तैयार माना जाता है।

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