अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे के लिए गेहूं की सही किस्म का चयन बहुत जरूरी होता है। अलग-अलग क्षेत्रों, मिट्टी और सिंचाई की स्थिति के अनुसार किस्म बदल जाती है। नीचे 2026 के लिए किसानों द्वारा व्यापक रूप से अपनाई जा रही लोकप्रिय उन्नत किस्मों की जानकारी दी गई है।

प्रमुख उन्नत किस्में
HD 2967 – अधिक पैदावार देने वाली और रोग प्रतिरोधक किस्म, उत्तर भारत में सबसे ज्यादा बोई जाती है।
HD 3086 – उत्तर भारत के लिए उपयुक्त, अच्छी दाने की गुणवत्ता और स्थिर उत्पादन देती है।
PBW 550 – अच्छी गुणवत्ता वाली किस्म, सामान्य सिंचाई वाले क्षेत्रों में भरोसेमंद उत्पादन।
DBW 187 – जल्दी पकने वाली उन्नत किस्म, रोगों के प्रति बेहतर सहनशीलता।
औसत उत्पादन क्षमता
उन्नत किस्मों और सही कृषि प्रबंधन के साथ गेहूं का औसत उत्पादन
18 से 22 क्विंटल प्रति बीघा तक प्राप्त किया जा सकता है।
(उत्पादन क्षेत्र, मौसम और खेती की तकनीक पर निर्भर करता है)
किस क्षेत्र के लिए कौन-सी किस्म उपयुक्त है
HD 2967 और HD 3086 उत्तर भारत के सिंचित क्षेत्रों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
PBW 550 सामान्य सिंचाई वाले क्षेत्रों में स्थिर उत्पादन देती है, जबकि DBW 187 कम समय में पकने वाली किस्म है, जो बदलते मौसम में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती है।

बीज की मात्रा और उपलब्धता
एक बीघा खेत के लिए लगभग 18 से 20 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है।
बीज हमेशा सरकारी कृषि केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या प्रमाणित विक्रेताओं से ही खरीदना चाहिए, ताकि शुद्ध और रोग-मुक्त बीज मिल सके।
बीज चयन के लाभ
• फसल में रोग लगने की संभावना कम होती है
• दाने की गुणवत्ता बेहतर होती है
• उत्पादन बढ़ता है
• कुल मुनाफा अधिक होता है
गेहूं की खेती की लागत और मुनाफा 2026 | प्रति बीघा खर्च
गेहूं की खेती के लिए जरूरी सुझाव
• समय पर बुवाई करें
• संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरक दें
• सिंचाई का सही प्रबंधन रखें
• रोग व कीट का समय पर उपचार करें

निष्कर्ष
सही किस्म का चयन करके गेहूं की पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। क्षेत्र और मौसम के अनुसार उन्नत किस्म अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं
